पहली बार किसी कविता को पढ़कर आंसू आ गए

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पहली बार किसी कविता को पढ़कर आंसू आ गए 

​दुध पिलाया जिसने छाती से निचोड़कर​
​मैं​ ​"निकम्मा, कभी 1 ग्लास पानी पिला न सका ।​

​बुढापे का "सहारा,, हूँ​ ​"अहसास" दिला न सका​
​पेट पर सुलाने वाली को​ ​"मखमल,​ ​पर सुला न सका ।​
​वो "भूखी, सो गई "बहू, के "डर, से एकबार मांगकर​
​मैं "सुकुन,, के "दो, निवाले उसे खिला न सका ।​

​नजरें उन "बुढी, "आंखों से कभी मिला न सका ।​
​वो "दर्द, सहती रही में खटिया पर तिलमिला न सका ।​ 

​जो हर "जीवनभर" "ममता, के रंग पहनाती रही मुझे​
​उसे "दिवाली  पर दो "जोड़ी, कपडे सिला न सका ।​ ​

​"बिमार बिस्तर से उसे "शिफा, दिला न सका ।​
​"खर्च के डर से उसे बड़े​ ​अस्पताल, ले जा न सका ।​ 

​"माँ" के बेटा कहकर "दम,तौडने बाद से अब तक सोच रहा हूँ​,
​"दवाई, इतनी भी "महंगी,, न थी के मैं ला ना सका​ । 

​माँ तो माँ होती हे भाईयों माँ अगर कभी गुस्से मे गाली भी दे तो उसे उसका "Duaa"​ ​समझकर भूला देना चाहिए​|

​मैं  यह वादा करता  अगर यह पोस्ट आप दस ग्रुप मे भेजोगे तो कम से कम दो लड़के ईस पोस्ट को पढ कर अपनी माँ के बारे मे सोचेंगे जरुर!!!!!!!!​

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