Holi Festival- "क्या आपको होली के बारे में ये सब पता है"

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Holi Ke Bare Me Puri Jankari- होली के 3 अर्थ है

(1) होली -आर्थात हम भगवान के "होलिए" । तन, मन, धन, समय, स्वांस, सन्कल्प, सब भगवान के  लिए है ।भगवान के दिए हुए हैं।
(2) होली :-अर्थात जो बात "होली"सो होली ।अर्थात विगत बात(past is past) जो हो गया सो हो गया।
(3)होली:-अर्थात पवित्रता( purity) holi अर्थात his holiness .
ये तीनों ही अर्थ हमारे लिए बहुत ही कल्याणकारी हैं meaning full हैं ।हम भगवान के अनुसार जीवन जियें ।बीती बातों का चिंतन न करें।जीवन को दिव्यता से भर ले।पवित्रता को अपनाए। ऐसी सच्ची होली मनानी हैं l
Holi Ke Bare Me Puri Jankari- होली के 3 अर्थ है

Holi Kyo Manaya Jata Hai

प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नाम का एक अत्यंत बलशाली असुर था। अपने बल के दर्प में वह स्वयं को ही ईश्वर मानने लगा था। उसने अपने राज्य में ईश्वर का नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी। हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद ईश्वर भक्त था। प्रह्लाद की ईश्वर भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकशिपु ने उसे अनेक कठोर दंड दिए, परंतु उसने ईश्वर की भक्ति का मार्ग न छोड़ा। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में भस्म नहीं हो सकती। हिरण्यकशिपु ने आदेश दिया कि होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठे। आग में बैठने पर होलिका तो जल गई, पर प्रह्लाद बच गया। ईश्वर भक्त प्रह्लाद की याद में इस दिन होली जलाई जाती है। प्रतीक रूप से यह भी माना जता है कि प्रह्लाद का अर्थ आनन्द होता है। वैर और उत्पीड़न की प्रतीक होलिका (जलाने की लकड़ी) जलती है और प्रेम तथा उल्लास का प्रतीक प्रह्लाद (आनंद) अक्षुण्ण रहता है
 

Holi Kab Aur Kaise Manaya Jata Hai

यह पर्व पंचाफाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। रंगों का त्यौहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। यह प्रमुखता से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता है। पहले दिन को होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते हैं। दूसरे दिन लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए कपड़े पहन कर शाम को लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयाँ खिलाते हैं।

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