ये चंद लाइने आपके दिल को झकजोर के रख देंगी

No Comments
कहाँ पर बोलना है और कहाँ पर बोल जाते हैं।
जहाँ खामोश रहना है वहाँ मुँह खोल जाते हैं।।
कटा जब शीश सैनिक का तो हम खामोश रहते हैं।
कटा एक सीन पिक्चर का तो सारे बोल जाते हैं।। 


ये कुर्सी मुल्क खा जाए तो कोई कुछ नहीँ कहता।
मगर रोटी की चोरी हो तो सारे बोल जाते हैं।।
नयी नस्लों के ये बच्चे जमाने भर की सुनते हैं।
मगर माँ बाप कुछ बोले तो बच्चे बोल जाते हैं।।
बहुत ऊँची दुकानों में कटाते जेब सब अपनी।
मगर मज़दूर माँगेगा तो सिक्के बोल जाते हैं।।
गरीबों के घरों की बेटियाँ अब तक कुँवारी हैं।
कि रिश्ता कैसे होगा जबकि गहने बोल जाते हैं।।
अगर मखमल करे गलती तो कोई कुछ नहीँ कहता।
फटी चादर की गलती हो तो सारे बोल जाते हैं।।
हवाओं की तबाही को सभी चुपचाप सहते हैं।
च़रागों से हुई गलती तो सारे बोल जाते हैं।।
बनाते फिरते हैं रिश्ते जमाने भर से हम अक्सर।
मगर घर में जरूरत हो तो रिश्ते बोल जाते हैं।।

Dear readers, after reading the Content please ask for advice and to provide constructive feedback Please Write Relevant Comment with Polite Language.Your comments inspired me to continue blogging. Your opinion much more valuable to me. Thank you.